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बुलडोज़र रिपब्लिक

बुलडोज़र रिपब्लिक का ये रूप योगी जी की सभी खोजों में से सबसे बेहतरीन खोज है । इसको पूर्ण रूप से भारतीय दंड संहिता से बदल कर लागू कर देना चाहिए । वैसे भी भारतीय दंड संहिता 1862 में अंग्रेजी सरकार द्वारा लागू की गई कानूनी व्यवस्था है , अंग्रेजो को शायद न्याय की ये प्रक्रिया ज़्यादा बेहतर लगती है , जिसका आधार ही ये है कि चाहे सौ गुनाहगार छूट जाए परंतु किसी एक भी बेकसूर को सज़ा नहीं मिलनी चाहिए । भारत में हमें ये बुलडोज़र वाली प्रक्रिया पसंद है , इसका सबसे बड़ा फायदा तो ये है कि किसी भी तरह की न्यायिक संस्थाओं की ज़रूरत नहीं पड़ेगी । अदालतों , न्यायधीशों , वकीलों व न्यायिक संस्था पर होने वाले किसी भी तरह के आर्थिक नुकसान से हम बचेंगे । पुलिस व सरकार तुरंत दोषी की पहचान करके बुलडोज़र का इस्तेमाल कर पाएगी । दूसरा दंड के हिसाब से सज़ा तय कर दी जाएगी , जैसे टैक्स चोरी करने पर आपके पारिवारिक मकान का बाहर निकला हुआ छज्जा तोड़ा जाएगा , बिजली चोरी करने पर आपके घर की अवैध पार्किंग तोड़ी जाएगी , आपके घर का कोई भी सदस्य किसी भी तरह के जुर्म में संलिप्त पाया जाता है तो सरकार के पास ये अधिकार होगा कि वो चाहे तो आ...
हाल की पोस्ट

ऐसे बनेगा ' हिन्दू राष्ट्र ' - हिमांशु कटारिया

मुसलमानों के तो 26 देश हैं , हिन्दूओं के पास तो सिर्फ़ भारत है , हम सभी हिन्दूओं को अपने तन-मन-धन से इस देश को 'हिन्दू राष्ट्र' बनाने के काम में जुट जाना चाहिए । पिछले कुछ सालों में ये उम्मीद बनी भी , कई ऐसे प्रयास किये गए जिससे मुसलमानों को उनकी सही जगह दिखाई जा सके , परंतु हाल ही में भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा व नवीन जिंदल पर लगे प्रतिबंधों ने भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की मुहिम को यकीनन एक चोट पहुँचाई है । मामला कुछ यूं था कि नूपुर शर्मा ने एक टीवी चैनल की डिबेट में इस्लाम धर्म के पैगम्बर मोहम्मद के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी , उसी बात को एक और भाजपा नेता नवीन जिंदल ने अपने ट्वीटर के ज़रिए आगे बढ़ा दिया । इस पर इस्लामिक देशों से कई निंदा भरे बयान आये , वहां रह रहे भारतीयों को अपमान का सामना करना पड़ा , मुख्यतः क़तर , ईरान व कुवैत ऐसे देश थे जहां से आधिकारिक रूप से भारतीय सरकार से जवाब मांगा । इस पर भाजपा ने नूपुर शर्मा व नवीन जिंदल को पार्टी से निलंबित करते हुए एक प्रेस नोट जारी किया जिसमें कहा कि भाजपा सभी धर्मों का आदर करती है व किसी भी धर्म के बारे में कही गई किसी भी अ...

सीधे-सादे अक्षय - अक्षय

सच का पता चल चुका है । आज तक जो भी आपको पढ़ाया बताया गया वो सब झूठ है । अक्षय कुमार का असली नाम राजीव भाटिया है , इनके पिता एक आर्मी अफसर थे , 1970-80 के दशक में जब देश को फ़ौज में पढ़े-लिखे नौजवानों की ज़रूरत थी , तब ये अपनी कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर पिता के पैसों पर थाईलैंड चले गए थाई बॉक्सिंग नामक मार्शल आर्ट सीखने । भारत में कराटे में ब्लैक बेल्ट लेने व मुआये थाई नामक मार्शल आर्ट सीखने के बाद उसे छोड़ , ये कोलकत्ता में ट्रेवल एजेंसी में बतौर होटल चीफ काम करने चले गए । छोड़ने का सिलसिला यहां नहीं रुका इसके बाद होटल का काम छोड़ , मुम्बई आ गए मार्शल आर्ट सिखाना शुरू किया , फिर उसे छोड़ मॉडलिंग का रास्ता पकड़ा । फिर उसे छोड़ असिस्टेंट  फोटोग्राफर का काम पकड़ा , कभी - कभी बतौर बैकग्राउंड डांसर का काम भी किया । अंत में सबकुछ छोड़ एक्टर बन गए पहली फ़िल्म 'दीदार' मिल गई ।  1991 - 1999 के दौरान लगभग 45 फिल्मों में काम किया जिनमें अधिकतर या तो औसत या सुपर फ्लॉप रही , जब तब कैरियर की नैया डूबती नज़र आई , 'खिलाड़ी' श्रृंखला की फिल्मों ने इनका कैरियर ज़िंदा रखा । हालांकि इस दौरान मोहरा , इंसाफ , दिल ...

अम्बेडकर की 'जयंती'

 14 अप्रैल को फेसबुक , व्हाट्सएप्प , ट्विटर पर बहुत सी तसवीरें देखी बाबा साहब अम्बेडकर की जयंती की। सब तस्वीरों में ज़्यादातर एक बात देखने को मिली , जिसमें बाबा साहब को संविधान निर्माता बताने पर ज़ोर था । बाबा साहब के विचार को सिर्फ संविधान निर्माण तक समेट कर रखने की जुगत हमेशा से चलती आ रही है । हालांकि बाबा साहब का ज़ोर समस्त भारतीय समाज से असमानता व अशिक्षा हटाने पर भी था , जिसमें भी उनका मानना था की शोषित समाज को तो हर हाल में शिक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए , उनके अनुसार शोषित समाज को उनके शोषण से निकालने का एकमात्र रास्ता शिक्षा है । फ़िर भी शोषित समाज में से भी कई वर्गों को मैं बढ़ चढ़ कर बाबा साहब का नाम जपता देखता हूँ , तो लगता है वाकई आज के समय में जब भारत में सोशल मीडिया अम्बेडकर विरोधी जानकारियों से भरा पड़ा हैं , कोई तो है जो आज भी अम्बेडकर को अपने में ज़िंदा रखे है । मगर जब मैं गहराई से उस समाज की सच्चाई से वाक़िफ़ होता हूँ तो पाता हूँ की वह समाज भी अन्य दूसरे समाजों की तरह अम्बेडकर के विचारों से उतना ही अनभिज्ञ है । वह समाज भी शिक्षा के प्रति उतना ही अरुचि से भरा पड़ा है जैसे अ...

भगत सिंह - बंदूक और विचार

 ‌शहीद भगत सिंह भारतीय इतिहास का एक ऐसा सितारा जिसे आसमान से ज़मीन पर लाने में हमने कोई कमी नहीं छोड़ी है । बेहद विलक्षण प्रतिभा के धनी भगत सिंह को बिना जाने , जानने का जो ढोंग हम इतने सालों से करते रहे है उसका परिणाम ये हुआ कि हम भगत सिंह से इतनी दूर चले गए है कि हमें बस भगत सिंह बंदूकों , टी शर्टस , प्रोफ़ाइल पिक्चरों और बस नारों में दिखाई या सुनाई देते है । भगत सिंह मात्र 23 वर्ष की उम्र में देश की आज़ादी के लिए इस दुनिया को अलविदा कहने वाले नौजवान , जिस उम्र में शायद आज इस आज़ाद भारत का युवा इधर उधर सिर्फ विराट - रोहित , सलमान - शाहरुख , मोदी - राहुल की खींच तान में व्यस्त होता है , उस उम्र में अपना जीवन देश के लिए त्यागने से पहले अपने विचारो का एक विशाल भंडार भगत सिंह ने हमारे लिए छोड़ा है । भगत सिंह की छवि को सिर्फ एक ऐसे क्रांतिकारी के रूप में याद रखना जो आज़ादी पाने के लिए हिंसा का सहारा लेने से भी पीछे नहीं हटता उनके विचारों और उनकी शख्सियत के साथ गद्दारी है । कई मित्र उनकी फोटो लगा कर या उनकी एक लाइन में लिखा कोई विचार दूसरों के साथ साझा कर अपने आप को भगत सिंह का परम भक्त...

.........अब्बू तुम्हें मारेंगे नही

क्या किसी इस्लाम, हिंदुत्व, ईसाईयत या किसी भी धर्म या मज़हब में किसी और धर्म या मज़हब के इंसान से नाता जोड़ना या विवाह करना किसी दूसरे इंसान को मार देने से भी ज़्यादा बड़ा गुनाह है? ...

नेता , एंकर , पोस्ट और गाँधी

"बिड़ला भवन में शाम पाँच बजे प्रार्थना होती थी लेकिन गान्धीजी सरदार पटेल के साथ मीटिंग में व्‍यस्‍त थे। तभी सवा पाँच बजे उन्‍हें याद आया की  प्रार्थना के लिए देर हो रही है। 30 जनवरी 1948 की शाम जब बापू आभा और मनु के कन्धों पर हाथ रखकर मंच की तरफ बढ़े कि उनके सामने नाथूराम गोडसे आ गया। उसने हाथ जोड़कर कहा - "नमस्‍ते बापू!" गान्धी के साथ चल रही मनु ने कहा - "भैया! सामने से हट जाओ, बापू को जाने दो। बापू को पहले ही देर हो चुकी है।" लेकिन गोडसे ने मनु को धक्‍का दे दिया और अपने हाथों में छुपा रखी छोटी बैरेटा पिस्टल से गान्धी के सीने पर तीन गोलियाँ दाग दीं। 78 साल के महात्‍मा गान्धी की हत्‍या हो चुकी थी। बिड़ला हाउस में गान्धी के शरीर को ढँककर रखा गया था। लेकिन जब उनके सबसे छोटे बेटे देवदास गान्धी वहाँ पहुँचे तो उन्‍होंने बापू के शरीर से कपड़ा हटा दिया ताकि दुनिया शान्ति और अहिंसा के पुजारी के साथ हुई हिंसा को देख सके।" एक ऐसा वाकया जिसने शायद हमेशा के लिए भारत देश के जनमानस में द्वेष का वो बीज बो दिया जो आज तक हमें व एक दूसरे के प्रति हमारी मानवीय सवेंदना को लग...