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जून, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बुलडोज़र रिपब्लिक

बुलडोज़र रिपब्लिक का ये रूप योगी जी की सभी खोजों में से सबसे बेहतरीन खोज है । इसको पूर्ण रूप से भारतीय दंड संहिता से बदल कर लागू कर देना चाहिए । वैसे भी भारतीय दंड संहिता 1862 में अंग्रेजी सरकार द्वारा लागू की गई कानूनी व्यवस्था है , अंग्रेजो को शायद न्याय की ये प्रक्रिया ज़्यादा बेहतर लगती है , जिसका आधार ही ये है कि चाहे सौ गुनाहगार छूट जाए परंतु किसी एक भी बेकसूर को सज़ा नहीं मिलनी चाहिए । भारत में हमें ये बुलडोज़र वाली प्रक्रिया पसंद है , इसका सबसे बड़ा फायदा तो ये है कि किसी भी तरह की न्यायिक संस्थाओं की ज़रूरत नहीं पड़ेगी । अदालतों , न्यायधीशों , वकीलों व न्यायिक संस्था पर होने वाले किसी भी तरह के आर्थिक नुकसान से हम बचेंगे । पुलिस व सरकार तुरंत दोषी की पहचान करके बुलडोज़र का इस्तेमाल कर पाएगी । दूसरा दंड के हिसाब से सज़ा तय कर दी जाएगी , जैसे टैक्स चोरी करने पर आपके पारिवारिक मकान का बाहर निकला हुआ छज्जा तोड़ा जाएगा , बिजली चोरी करने पर आपके घर की अवैध पार्किंग तोड़ी जाएगी , आपके घर का कोई भी सदस्य किसी भी तरह के जुर्म में संलिप्त पाया जाता है तो सरकार के पास ये अधिकार होगा कि वो चाहे तो आ...

ऐसे बनेगा ' हिन्दू राष्ट्र ' - हिमांशु कटारिया

मुसलमानों के तो 26 देश हैं , हिन्दूओं के पास तो सिर्फ़ भारत है , हम सभी हिन्दूओं को अपने तन-मन-धन से इस देश को 'हिन्दू राष्ट्र' बनाने के काम में जुट जाना चाहिए । पिछले कुछ सालों में ये उम्मीद बनी भी , कई ऐसे प्रयास किये गए जिससे मुसलमानों को उनकी सही जगह दिखाई जा सके , परंतु हाल ही में भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा व नवीन जिंदल पर लगे प्रतिबंधों ने भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की मुहिम को यकीनन एक चोट पहुँचाई है । मामला कुछ यूं था कि नूपुर शर्मा ने एक टीवी चैनल की डिबेट में इस्लाम धर्म के पैगम्बर मोहम्मद के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी , उसी बात को एक और भाजपा नेता नवीन जिंदल ने अपने ट्वीटर के ज़रिए आगे बढ़ा दिया । इस पर इस्लामिक देशों से कई निंदा भरे बयान आये , वहां रह रहे भारतीयों को अपमान का सामना करना पड़ा , मुख्यतः क़तर , ईरान व कुवैत ऐसे देश थे जहां से आधिकारिक रूप से भारतीय सरकार से जवाब मांगा । इस पर भाजपा ने नूपुर शर्मा व नवीन जिंदल को पार्टी से निलंबित करते हुए एक प्रेस नोट जारी किया जिसमें कहा कि भाजपा सभी धर्मों का आदर करती है व किसी भी धर्म के बारे में कही गई किसी भी अ...

सीधे-सादे अक्षय - अक्षय

सच का पता चल चुका है । आज तक जो भी आपको पढ़ाया बताया गया वो सब झूठ है । अक्षय कुमार का असली नाम राजीव भाटिया है , इनके पिता एक आर्मी अफसर थे , 1970-80 के दशक में जब देश को फ़ौज में पढ़े-लिखे नौजवानों की ज़रूरत थी , तब ये अपनी कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर पिता के पैसों पर थाईलैंड चले गए थाई बॉक्सिंग नामक मार्शल आर्ट सीखने । भारत में कराटे में ब्लैक बेल्ट लेने व मुआये थाई नामक मार्शल आर्ट सीखने के बाद उसे छोड़ , ये कोलकत्ता में ट्रेवल एजेंसी में बतौर होटल चीफ काम करने चले गए । छोड़ने का सिलसिला यहां नहीं रुका इसके बाद होटल का काम छोड़ , मुम्बई आ गए मार्शल आर्ट सिखाना शुरू किया , फिर उसे छोड़ मॉडलिंग का रास्ता पकड़ा । फिर उसे छोड़ असिस्टेंट  फोटोग्राफर का काम पकड़ा , कभी - कभी बतौर बैकग्राउंड डांसर का काम भी किया । अंत में सबकुछ छोड़ एक्टर बन गए पहली फ़िल्म 'दीदार' मिल गई ।  1991 - 1999 के दौरान लगभग 45 फिल्मों में काम किया जिनमें अधिकतर या तो औसत या सुपर फ्लॉप रही , जब तब कैरियर की नैया डूबती नज़र आई , 'खिलाड़ी' श्रृंखला की फिल्मों ने इनका कैरियर ज़िंदा रखा । हालांकि इस दौरान मोहरा , इंसाफ , दिल ...