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ऐसे बनेगा ' हिन्दू राष्ट्र ' - हिमांशु कटारिया

मुसलमानों के तो 26 देश हैं , हिन्दूओं के पास तो सिर्फ़ भारत है , हम सभी हिन्दूओं को अपने तन-मन-धन से इस देश को 'हिन्दू राष्ट्र' बनाने के काम में जुट जाना चाहिए । पिछले कुछ सालों में ये उम्मीद बनी भी , कई ऐसे प्रयास किये गए जिससे मुसलमानों को उनकी सही जगह दिखाई जा सके , परंतु हाल ही में भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा व नवीन जिंदल पर लगे प्रतिबंधों ने भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की मुहिम को यकीनन एक चोट पहुँचाई है । मामला कुछ यूं था कि नूपुर शर्मा ने एक टीवी चैनल की डिबेट में इस्लाम धर्म के पैगम्बर मोहम्मद के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी , उसी बात को एक और भाजपा नेता नवीन जिंदल ने अपने ट्वीटर के ज़रिए आगे बढ़ा दिया । इस पर इस्लामिक देशों से कई निंदा भरे बयान आये , वहां रह रहे भारतीयों को अपमान का सामना करना पड़ा , मुख्यतः क़तर , ईरान व कुवैत ऐसे देश थे जहां से आधिकारिक रूप से भारतीय सरकार से जवाब मांगा । इस पर भाजपा ने नूपुर शर्मा व नवीन जिंदल को पार्टी से निलंबित करते हुए एक प्रेस नोट जारी किया जिसमें कहा कि भाजपा सभी धर्मों का आदर करती है व किसी भी धर्म के बारे में कही गई किसी भी अपमानजनक बात का समर्थन नहीं करती है , इसके अलावा ये भी कहा कि भाजपा ऐसे किसी भी विचार रखने वाले व्यक्ति का समर्थन नहीं करती है । 
क़तर , ईरान व कुवैत वैसे तो इस्लामिक देश है परंतु इसके बावजूद ये भारत के मित्र देश माने जाते रहे हैं । सैन्य , खुफिया एजेंसियों व आर्थिक रिश्तों के अलावा भी भारत के इन सभी देशों से सांस्कृतिक व ऐतिहासिक रिश्ते रहे हैं । क़तर में जहां लगभग 7 लाख भारतीय रहते हैं , वहीं कुवैत में 6 लाख 40 हज़ार भारतीयों समेत मिडल ईस्टर्न देशों में लगभग 90 लाख भारतीय आज भी रह रहे हैं । 
मेरा मानना है इन सभी बातों के बावजूद भारतीय जनता पार्टी को इस मुद्दें पर किसी भी तरह की कार्यवाही नहीं करनी चाहिए थी । इस विचार के पीछे के मेरे प्रमुख कारणों में से एक मोदी जी की छवि धूमिल होना भी है , कांग्रेस के शासनकाल में इतने सालों से बेइज़्ज़ती भरा शासन झेलने के बाद हम हिन्दूओं के लिए लगभग 800 साल बाद एक बार फिर मोदी जी के शासन में सर उठा कर इज़्ज़त के साथ जीने का मौका आया था , इस दौरान मोदी जी की जो शेर छवि दुनिया भर में बनी थी निश्चित ही इस कार्यवाही से उस छवि को चोट पहुँची है ।
 क्या भारत का प्रधानमंत्री कुछ लाख करोड़ के अंतरराष्ट्रीय निवेश , सैन्य समझौतों व कच्चे तेल-प्राकृतिक गैस जैसी चीज़ों के आयात के लिए झुक गया ?
क्या 90 लाख मिडल ईस्ट में रह रहे भारतीय , भारत को एक हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए समय आने पर अपने प्राणों का दान नहीं दे सकते ?
क्या भारतीय सरकार को सामने से इन देशों द्वारा मिलने वाली मदद , व्यापार व रिश्तों को ठुकरा कर , भारत को एक हिन्दू राष्ट्र घोषित नहीं कर देना चाहिए था ?
क्या हम हिन्दू , अपने घर के ए सी कमरों में बैठकर कभी भी भारत को हिन्दू राष्ट्र बना पाएंगे ?
क्या इस देश का हिन्दू भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए अपने बच्चों के प्राणों का दान नहीं दे सकता ?
नहीं मुझे ऐसा नहीं लगता मेरा मानना है कि हिन्दू राष्ट्र के सपने को साकार करने के लिए इस देश का हिन्दू अपने घर , परिवार , अपने बच्चों के प्राणों की आहुति खुशी-खुशी दे देगा ।
इसलिए मोदी जी को तुरंत नूपुर शर्मा व नवीन जिंदल पर लगे निलंबन को हटा कर , इन सभी इस्लामिक देशों से सभी प्रकार के संबंध ख़त्म कर के , भारत को तुरंत एक हिन्दू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए , ऐसा न करने की स्थिति में जो करोड़ो हिन्दू भारत में दिन-प्रतिदिन इस्लाम के अत्याचारों से लड़ रहे हैं उनके मन में भय की स्थिति पैदा होगी , उन्हें लगेगा कि शायद कल किसी और दबाव के चक्कर में मोदी जी किसी भक्त को ही जेल में डालकर डंडे न पड़वा दे ।
विदेश में रह रहे भारतीयों को भी इस नेक काम में बढ़-चढ़कर साथ देना चाहिए व किसी भी समय अपने प्राणों की आहुति देने के लिए तैयार रहना चाहिए , कभी भी उनके बलिदान की ज़रूरत भारत देश को पड़ सकती है ।
अंत में हम सभी भारतीय हिन्दूओं को भी तैयार रहना होगा , अपने ए सी कमरों को छोड़कर , किसी भी वक़्त अपने घर-मकान , व्यापार , परिवार व बच्चों के प्राणों का बलिदान देने के लिए , यह हज़ारो सालों से लगा हुआ कलंक है इसे मिटाने के लिए हर हिन्दू को ज़ोर-शोर से आगे आना ही होगा । 
मैं नहीं कह रहा कि इस नेक काम के दौरान सिर्फ़ आपके ही बलिदान की ज़रूरत पड़ेगी , कई मुसलमान भी मारे जाएंगे । मगर अगर आपका चुन्नू - मुन्नू - पप्पू - भोलू कोई भी मारा जाता है , तो आपको अपने तेवरों को कम नहीं होने देना हैं । आपको देखना है कि मेरा चुन्नू तो मारा गया , पर कोई बात नहीं मोहल्लें के अब्दुल का बच्चा भी तो मारा गया , इस तरह से हिसाब बराबर करते हुए अंत में जब हम भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने में कामयाब होंगे , उस दिन मुमकिन है कि हमारे परिवार के कई सदस्य , हमारे बच्चें या शायद हम ख़ुद उस दिन को देखने के लिए जिंदा न हो । हमारा अपना घर न हो , व्यापार न हो , परंतु हिन्दू राष्ट्र में एक सांस ले पाने की वो अनुभूति ऐसे करोड़ो व्यर्थ वस्तुओं के आगे कुछ भी नहीं । 
- हिमांशु कटारिया

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