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वैवाहिक बलात्कार और भारतीय सरकार का रुख़

Marital Rape यानि विवाह के उपरांत अपने साथी के साथ उसकी इजाज़त व ईच्छा के विरुद्ध ज़ोर जबरदस्ती करना ( शारीरिक संबंध बनाना अथवा कोशिश करना )।
भारत जैसे देश मे ही नही बल्कि पूरे विश्व भर में जहाँ पितृसत्तात्मक समाज में विवाह के बाद भी पत्नी पक्ष के किसी भी प्रकार के विचार को मानना या उनका बोलना तक पति पक्ष अपनी बेइज़्ज़ती समझते आये है। वहाँ शारीरिक संबंध बनाने से उनका इनक़ार करना, उस समय जब उनके पति ( भारतीय समाज में तो पति को पत्नी के लिए "भगवान" के समक्ष ही माना जाता रहा है ) संबंध बनाने का फ़ैसला कर चुके हो, यूरोपीय समाज में भी और भारतीय समाज में भी पितृसत्तात्मक सोच के इन 'मर्दों' के लिए बेइज़्ज़ती व असुरक्षा की बात है , क्योंकि जहाँ औरतों के किसी ऐसे विचार से जहाँ इन की कामेच्छा में ख़लल पड़ती है वहीं किसी न किसी रूप में थोड़ी ही सही पर अपनी बात कहने की व ईच्छा ज़ाहिर करने की स्वतंत्रता महिलाओं को मिलती है।
हालांकि पश्चिमी देशों में ख़ासकर संयुक्त राष्ट्र अमेरिका व ब्रिटेन में 19वीं शताब्दी की शुरुआत में महिला सशक्तिकरण के आंदोलनों के उत्थान के समय से ही इसका विरोध होना शुरू हो गया था।
1736 में History of the Pleas of the Crown में Sir Mathhew Hale के मुताबिक " पत्नी को खुद को पति के प्रति इस तरह से समर्पित करना चाहिए, की वो फिर खुद को वापिस नही (retract) ले सकती।"
मगर 19वीं शताब्दी में महिला विचारों के आवाज़ उठाने के बाद 1929 में Bertrand Russel (Nobel laureat) ने अपनी किताब Marriage and Morals में कहा की
" महिलायों के साथ विवाह के उपरांत अनिच्छा से होने वाले संभोग की घटनाएं , एक वेश्या के साथ अनिच्छा से होने वाले संभोग से ज़्यादा हो सकती है। "
हालांकि इन सब दबावों के बाद 1986 में यूरोपीय देशों ने इसे अपराध की श्रेणी में डाला व Marital Rape  के ख़िलाफ़ क़ानून बनाया। सभी अन्य विकसित व बड़े देशों के अलावा Zimbabwe (2001), Cambodia (2005), Nepal (2006), Bolivia (2013) सहित सैकड़ों देशों ने इसे अपराध माना है या इसके ख़िलाफ़ कानून बनाया है।
वही भारतीय कानून में IPC की धारा 375 के अंतर्गत Marital Rape को अपराध माना गया है केवल यदि पत्नी की उम्र 15 साल से कम हो।
रिसर्चर Finkelhor व Yllo ने 1985 में Metropolitan Boston की अपनी रिसर्च में माना कि
" जब एक अनजान व्यक्ति किसी महिला का बलात्कार करता है उस महिला को अपनी उन भयावह यादों के साथ जीना होता है, परन्तु जब खुद उसका पति उसकी ईच्छा के विरुद्ध उससे शारीरिक संबंध बनाता है तो उसे रोज़ उस बलात्कारी के साथ रहना पड़ता है।"
वही भारत में दिल्ली हाई कोर्ट में इसकी सुनवाई के दौरान कल भारत की BJP की मोदी सरकार ने हाई कोर्ट को ये हलफनामा दिया है जिसमे कहा गया है कि " अन्य पश्चिमि देशों ने भले ही Marital Rape को अपराध की श्रेणी में डाल दिया हो परन्तु हम ऐसी भूल कभी नही करेंगे हम अपनी संस्कृति को अन्य देशों के दबाव में आकर नही बदलेंगे।"
पिछले सप्ताह जब मुस्लिम समाज के तीन तलाक़ सम्बन्धित किसी क़ानून को गैर कानूनी घोषित किया गया, तो पूरे देश सहित , मुस्लिम समाज ने व सभी राजनीतिक दलों ने भी इसे मुस्लिम महिलाओं के हक़ में मानते हुये इस फ़ैसले का स्वागत किया। BJP व मोदी सरकार ने भी इस फ़ैसले का श्रेय लेने में कोई कोर-कसर नही छोड़ी। परन्तु उम्मीदों के परे जाकर इस मुद्दे पर ऐसी बेतुकी बात कह कर Marital Rape  जैसे प्रमुख महिला उत्थान के मुद्दे पर, जो महिलायों की घरेलू स्तिथियों को सदृण करेगा व उन्हें शारीरिक संबंध बनाने व न बनाने जैसे महत्वपूर्ण फ़ैसले में अपनी ईच्छा ज़ाहिर करने देने का काम करेगा। इसमे मोदी सरकार का रवैया व ये सोच दकियानूसी व पुरानी होने के साथ साथ महिला विरोधी भी है।
उम्मीद है हाल ही में भारतीय कानून व्यवस्था ने जैसे तीन तलाक़, निजता के क़ानून व राम रहीम के मुद्दे पर जिस निर्भयता के साथ सही पक्ष के हक़ में फ़ैसला सुनाया कुछ उसी तरह की नज़ीर अदालत इस मामले में भी पेश करेगी।
- हिमांशु कटारिया ✍

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