14 अप्रैल को फेसबुक , व्हाट्सएप्प , ट्विटर पर बहुत सी तसवीरें देखी बाबा साहब अम्बेडकर की जयंती की। सब तस्वीरों में ज़्यादातर एक बात देखने को मिली , जिसमें बाबा साहब को संविधान निर्माता बताने पर ज़ोर था । बाबा साहब के विचार को सिर्फ संविधान निर्माण तक समेट कर रखने की जुगत हमेशा से चलती आ रही है । हालांकि बाबा साहब का ज़ोर समस्त भारतीय समाज से असमानता व अशिक्षा हटाने पर भी था , जिसमें भी उनका मानना था की शोषित समाज को तो हर हाल में शिक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए , उनके अनुसार शोषित समाज को उनके शोषण से निकालने का एकमात्र रास्ता शिक्षा है । फ़िर भी शोषित समाज में से भी कई वर्गों को मैं बढ़ चढ़ कर बाबा साहब का नाम जपता देखता हूँ , तो लगता है वाकई आज के समय में जब भारत में सोशल मीडिया अम्बेडकर विरोधी जानकारियों से भरा पड़ा हैं , कोई तो है जो आज भी अम्बेडकर को अपने में ज़िंदा रखे है । मगर जब मैं गहराई से उस समाज की सच्चाई से वाक़िफ़ होता हूँ तो पाता हूँ की वह समाज भी अन्य दूसरे समाजों की तरह अम्बेडकर के विचारों से उतना ही अनभिज्ञ है । वह समाज भी शिक्षा के प्रति उतना ही अरुचि से भरा पड़ा है जैसे अ...